हरिओम राजोरिया हिन्दीभाषी कवियों में एक स्थापित नाम है। मध्य प्रदेश के छोटे से कस्बे (जिसे अब जिला होने का भी दर्जा मिल चुका है) अशोकनगर में रहने वाले हरिओम पेशे से तो इंजिनियर हैं पर उससे कहीं ज़्यादा कवि, रंगकर्मी और आम आदमी। इप्टा और प्रगतिशील लेखक संघ से जुड़े हरिओम की कविताओं में वे छोटी-छोटी चीज़ें...
मंगलवार, 25 अगस्त 2009
बुधवार, 12 अगस्त 2009
तीन रुपये किलो - अष्टभुजा शुक्ल
छोटे-छोटे घरों तकपहुँचे अमरूदनाक रख ली फलों कीबिके चार रुपए किलो नमक-मिर्च से भीखा लिए गएछिलके और बीज तककर दिए समर्पिततर गए पैसेअमरूद के साथ सजी-धजी दुकानों परबैठे-बैठेमहंगे फलों नेबहुत कोसा अमरूदों कोअपना भाव इतना गिराने के लिएबच्चों को चहकनहा बनाने के लिए फलों का राजा भी रिसियाया बहुतअमरूदों से तो...
गुरुवार, 6 अगस्त 2009
शहर-दर्-शहर घर जलाये गए - नासिर काज़मी
पाकिस्तान के मकबूल शायरों में से एक जनाब नासिर काज़मी की ग़ज़ल आपके रु-ब-रु है। नासिर काज़मी की पाकिस्तान के तरक्कीपसंद शाइरों में अपनी अलग पहचान है। शहर-दर्-शहर घर जलाये गयेयूँ भी जश्न-ए-तरब मनाये गयेइक तरफ़ झूम कर बहार आईइक तरफ़ आशियाँ जलाये गयेक्या कहूँ किस तरह सर-ए-बाज़ारइस्मतों के दिए बुझाये गयेआह...